कबीर के दोहे (पद्य) – Additional Questions Class 8 Hindi Kalika
🥇 खंड 1: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 Mark Questions) - 20 Questions
प्र 1. संत कबीर दास जी का जन्म कब हुआ था?
उत्तर: संत कबीर दास जी का जन्म सन् 1398 ई. में हुआ था। 😊
प्र 2. कबीर दास जी के दोहों को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: कबीर दास जी के दोहों को 'साखी' के नाम से भी जाना जाता है। 😊
प्र 3. 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े' में 'गोविंद' का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'गोविंद' का अर्थ ईश्वर या भगवान है। 😊
प्र 4. भगवान तक पहुँचने का मार्ग हमें कौन बताता है?
उत्तर: भगवान तक पहुँचने का मार्ग हमें हमारे 'गुरु' बताते हैं। 😊
प्र 5. 'काके लागौं पाँय' में 'पाँय' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'पाँय' का अर्थ 'पैर' या 'चरण' है। 😊
प्र 6. कबीर के अनुसार साधु का स्वभाव किसके जैसा होना चाहिए?
उत्तर: साधु का स्वभाव 'सूप' (सूपड़ा/कुला) के जैसा होना चाहिए। 😊
प्र 7. सूप किस चीज़ को उड़ा देता है?
उत्तर: सूप 'थोथा' (बेकार/असार) चीज़ों को उड़ा देता है। 😊
प्र 8. सूप किस चीज़ को अपने पास रख लेता है?
उत्तर: सूप 'सार' (अच्छी और काम की) चीज़ों को अपने पास रख लेता है। 😊
प्र 9. हमें हमेशा कैसी बानी (वाणी) बोलनी चाहिए?
उत्तर: हमें हमेशा मधुर और मीठी बानी बोलनी चाहिए। 😊
प्र 10. मीठी वाणी बोलने से हमारे मन का क्या खो जाता है?
उत्तर: मीठी वाणी बोलने से हमारे मन का 'आपा' (अहंकार) खो जाता है। 😊
प्र 11. मधुर वचन सुनने वाले (औरन) को क्या मिलता है?
उत्तर: मधुर वचन सुनने वाले को असीम शांति (शीतलता) मिलती है। 😊
प्र 12. किस पेड़ के बड़े होने पर भी उससे किसी का भला नहीं होता?
उत्तर: 'खजूर' के पेड़ के बड़े होने पर भी उससे किसी का भला नहीं होता। 😊
प्र 13. खजूर का पेड़ पथिक को क्या नहीं दे पाता?
उत्तर: खजूर का पेड़ पथिक (राहगीर) को छाया नहीं दे पाता। 😊
प्र 14. खजूर के फल कहाँ लगते हैं?
उत्तर: खजूर के फल बहुत दूर (अत्यधिक ऊँचाई पर) लगते हैं। 😊
प्र 15. हमें किसे अपने समीप (नियरे) रखना चाहिए?
उत्तर: हमें अपने 'निंदक' (आलोचक) को अपने समीप रखना चाहिए। 😊
प्र 16. कबीरदास जी ने निंदक के लिए कहाँ कुटी छवाने को कहा है?
उत्तर: कबीरदास जी ने निंदक के लिए अपने 'आँगन' में कुटी छवाने को कहा है। 😊
प्र 17. निंदक बिना पानी और साबुन के क्या स्वच्छ कर देता है?
उत्तर: निंदक बिना पानी और साबुन के हमारा 'स्वभाव' स्वच्छ कर देता है। 😊
प्र 18. 'दोऊ' शब्द का खड़ीबोली हिंदी रूप क्या है?
उत्तर: 'दोऊ' का खड़ीबोली हिंदी रूप 'दोनों' है। 😊
प्र 19. कबीर की रचनाओं का मुख्य संग्रह किस ग्रंथ में है?
उत्तर: कबीर की रचनाओं का संग्रह 'कबीर ग्रंथावली' में है। 😊
प्र 20. 'आपा' शब्द का पर्यायवाची क्या है?
उत्तर: 'आपा' शब्द का पर्यायवाची 'अहंकार' या 'घमंड' है। 😊
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🥈 खंड 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (2 Marks Questions) - 15 Questions
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प्र 1. कबीर ने गुरु और गोविंद में किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों?
उत्तर: कबीर ने गुरु को गोविंद (भगवान) से श्रेष्ठ माना है क्योंकि गुरु ही हमें वह ज्ञान देते हैं जिससे हम भगवान को प्राप्त कर सकते हैं। गुरु के बिना ईश्वर का मार्ग मिलना असंभव है। 🌸
प्र 2. 'बलिहारी गुरु आपने' का भाव क्या है?
उत्तर: इसका भाव यह है कि कवि अपने गुरु के प्रति स्वयं को न्योछावर (बलिहारी) करना चाहते हैं, क्योंकि गुरु की कृपा से ही उन्हें सत्य और ईश्वर का ज्ञान प्राप्त हुआ है। 🌸
प्र 3. सूप और एक अच्छे मनुष्य (साधु) में क्या समानता है?
उत्तर: सूप अच्छे अनाज को रख लेता है और कचरे को उड़ा देता है। उसी तरह एक अच्छे मनुष्य (साधु) को भी समाज की अच्छाइयों को अपनाना चाहिए और बुराइयों को त्याग देना चाहिए। 🌸
प्र 4. दोहे में 'थोथा' और 'सार' शब्दों का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?
उत्तर: 'सार' का अर्थ है जीवन के अच्छे और उपयोगी गुण (सद्गुण), जबकि 'थोथा' का अर्थ है बेकार, सारहीन बातें या दुर्गुण। 🌸
प्र 5. 'मन का आपा खोने' से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 'मन का आपा खोने' का तात्पर्य है अपने हृदय से घमंड, क्रोध और अहंकार को पूरी तरह निकाल देना। अहंकार मुक्त होकर ही मनुष्य मधुर बोल सकता है। 🌸
प्र 6. मधुर वाणी बोलने से स्वयं वक्ता (बोलने वाले) को क्या लाभ होता है?
उत्तर: मधुर वाणी बोलने से स्वयं वक्ता का मन शांत और शीतल रहता है। उसके हृदय में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वह आत्मिक खुशी महसूस करता है। 🌸
प्र 7. दूसरों (औरन) पर मीठी वाणी का क्या असर होता है?
उत्तर: जब हम दूसरों से मीठी वाणी में बात करते हैं, तो उनके मन का क्रोध शांत हो जाता है और उन्हें असीम शांति (शीतलता) और सुख का अनुभव होता है। 🌸
प्र 8. खजूर के पेड़ का उदाहरण किस संदर्भ में दिया गया है?
उत्तर: खजूर के पेड़ का उदाहरण ऐसे बड़े या अमीर लोगों के लिए दिया गया है, जो किसी के काम नहीं आते और जिनके पास दया या परोपकार की भावना नहीं होती। 🌸
प्र 9. केवल शरीर या धन से बड़ा होना क्यों व्यर्थ माना गया है?
उत्तर: धन या शरीर से बड़ा होना तब तक व्यर्थ है जब तक आप दूसरों की मदद नहीं करते। बड़प्पन धन में नहीं, बल्कि परोपकार और सेवा भाव में छिपा होता है। 🌸
प्र 10. निंदक को अपने आँगन में कुटी बनाकर क्यों रखना चाहिए?
उत्तर: निंदक को अपने पास रखने से वह बार-बार हमारी गलतियाँ बताता रहेगा, जिससे हम सजग रहेंगे और अपनी बुराइयों को सुधार कर एक बेहतर इंसान बन सकेंगे। 🌸
प्र 11. कबीर के अनुसार बिना साबुन और पानी के स्वभाव कैसे निर्मल होता है?
उत्तर: निंदक (आलोचक) द्वारा बताई गई हमारी कमियों को सुनकर जब हम उन्हें दूर कर लेते हैं, तो हमारा स्वभाव बिना साबुन और पानी के ही स्वच्छ और निर्मल हो जाता है। 🌸
प्र 12. कबीरदास जी किस प्रकार से कविता रचते थे?
उत्तर: कबीरदास जी एक संत थे, जो अपनी आजीविका के लिए करघे पर कपड़ा बुनते थे और कपड़ा बुनते-बुनते ही अपने मन में उठी शिक्षाप्रद कविताओं (दोहों) की रचना करते थे। 🌸
प्र 13. कबीर के दोहों (साखियों) से हमें क्या मुख्य प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: इन साखियों से हमें जीवन की सच्चाई को गहराई से समझने, अहंकार त्यागने, परोपकार करने और एक सच्चा तथा अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा मिलती है। 🌸
प्र 14. 'औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय' पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट करें।
उत्तर: इसका भाव है कि मीठे वचन दूसरों के मन को तो प्रसन्न और शांत करते ही हैं, साथ ही बोलने वाले के अपने मन को भी गहरी संतुष्टि और आनंद प्रदान करते हैं। 🌸
प्र 15. निंदक (आलोचक) को दूर रखने से हमें क्या हानि हो सकती है?
उत्तर: यदि हम निंदक को दूर रखेंगे, तो हमें कभी अपनी गलतियों का पता नहीं चलेगा। हम अहंकार में डूब जाएंगे और कभी भी अपने चरित्र और स्वभाव का सुधार नहीं कर पाएंगे। 🌸
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🏅 खंड 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 Marks Questions) - 5 Questions
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प्र 1. "गुरु गोविंद दोऊ खड़े..." दोहे का सप्रसंग भावार्थ अपने शब्दों में विस्तार से लिखिए।
उत्तर: प्रसंग: यह दोहा संत कबीरदास जी द्वारा रचित है। इसमें गुरु की महिमा और उनके श्रेष्ठ स्थान का वर्णन किया गया है।
भावार्थ: कबीरदास जी कहते हैं कि यदि मेरे सामने गुरु और भगवान (गोविंद) दोनों एक साथ खड़े हों, तो मैं दुविधा में पड़ जाऊंगा कि मुझे पहले किसके चरण स्पर्श करने चाहिए। फिर वे स्वयं निर्णय लेते हुए कहते हैं कि मैं सबसे पहले अपने गुरु के चरणों में ही अपना शीश झुकाऊंगा। इसका कारण यह है कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग और ईश्वर का ज्ञान मुझे गुरु ने ही प्रदान किया है। इसलिए गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा और महान है। 🌟
प्र 2. "साधू ऐसा चाहिए..." दोहे के माध्यम से कबीर दास जी मनुष्य को क्या संदेश देना चाहते हैं? सूप का उदाहरण देकर समझाएं।
उत्तर: संदेश: इस दोहे के माध्यम से कबीर दास जी हमें यह संदेश देते हैं कि एक सज्जन व्यक्ति (साधु) का स्वभाव सूप (सूपड़े) की तरह होना चाहिए।
उदाहरण का स्पष्टीकरण: जिस प्रकार सूप अनाज को फटकते समय अच्छे और काम के दानों (सार) को अपने अंदर बचा कर रख लेता है और बेकार छिलकों तथा कचरे (थोथा) को हवा में उड़ा देता है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य को समाज में व्याप्त बुराइयों, बेकार की बातों और दुर्गुणों को त्याग देना चाहिए। उसे केवल ज्ञान, सद्गुणों और अच्छी बातों को ही अपने जीवन में ग्रहण करना चाहिए। यही एक सच्चे और अच्छे मनुष्य की पहचान है। 🌟
प्र 3. मधुर वाणी के महत्व पर कबीर के विचारों को "ऐसी बानी बोलिए..." दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: महत्व: कबीरदास जी ने मधुर वाणी को जीवन में बहुत महत्वपूर्ण माना है। वे कहते हैं कि "ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।"
स्पष्टीकरण: मनुष्य को अपने हृदय से अहंकार और घमंड को पूरी तरह निकालकर हमेशा मीठे और नम्र शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। कटु वचन जहाँ विवाद और दुःख को जन्म देते हैं, वहीं मधुर वचन जादू की तरह काम करते हैं। मीठी वाणी बोलने से सुनने वाले व्यक्ति का क्रोध शांत हो जाता है और उसे अपार खुशी मिलती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि दूसरों को खुशी देने के साथ-साथ वक्ता का अपना मन भी द्वेष से मुक्त होकर परम शांति और शीतलता का अनुभव करता है। 🌟
प्र 4. "बड़ा हुआ तो क्या हुआ..." इस दोहे में कबीर ने बड़प्पन की क्या परिभाषा दी है? खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर विस्तार से समझाइए।
उत्तर: बड़प्पन की परिभाषा: कबीर दास जी के अनुसार असली बड़प्पन धन, दौलत, पद या शारीरिक विशालता में नहीं है, बल्कि परोपकार और दूसरों के काम आने में है।
खजूर का उदाहरण: कबीर जी खजूर के पेड़ का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा और विशाल होता है, लेकिन उसके इस बड़े आकार का कोई लाभ नहीं है। वह इतना सीधा और ऊँचा होता है कि थके हुए राहगीर (पंथी) को आराम करने के लिए उसकी छाया तक नहीं मिलती। साथ ही, उसके फल भी इतनी अधिक ऊँचाई पर लगते हैं कि कोई उन्हें आसानी से तोड़कर अपनी भूख नहीं मिटा सकता। इसी प्रकार, जो अमीर या बड़ा आदमी किसी गरीब के काम न आए, उसका वह बड़प्पन बिल्कुल व्यर्थ और खोखला है। 🌟
प्र 5. एक आलोचक (निंदक) हमारे जीवन में क्या सकारात्मक भूमिका निभाता है? "निंदक नियरे राखिए..." दोहे के आधार पर विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: सकारात्मक भूमिका: सामान्यतः लोग अपनी आलोचना सुनकर क्रोधित हो जाते हैं और निंदकों से दूर भागते हैं। लेकिन कबीर दास जी की सोच इसके बिल्कुल विपरीत है।
स्पष्टीकरण: कबीर जी कहते हैं कि हमें हमारी निंदा या आलोचना करने वाले लोगों को हमेशा अपने पास (नियरे) रखना चाहिए। हो सके तो उनके लिए अपने आँगन में ही कुटिया बना देनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि निंदक हमारी उन कमियों और बुराइयों को उजागर करता है जिन्हें हम अपने अहंकार के कारण नहीं देख पाते। उसकी आलोचना सुनकर हम स्वयं में सुधार करते हैं। इस प्रकार, एक आलोचक बिना पानी और साबुन का प्रयोग किए ही हमारी आत्मा और स्वभाव को पवित्र, निर्मल और स्वच्छ बना देता है। वह हमारे आत्म-सुधार का सबसे अच्छा माध्यम है। 🌟